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ज्योतिष के बारे मे

हमारी जिंदगी पर नव ग्रहो का प्रभाव

सूर्य का प्रकाश हर जगह पहुँचता है और उस प्रकाश का प्रभाव हर एक व्‍यक्ति पर पहुँचता है| तो क्या सौर मंडल मे बने नव ग्रहो का प्रभाव हमारे जीवन पर नही पड़ता? हाँ पृथ्वी के हर एक व्यक्ति पर उनका प्रभाव पड़ता है| ईश्वर ने इस पूरे ब्रह्माण्ड मे पृथ्वी के आस-पास नव ग्रहो को बनाया, ताकि हर एक व्यक्ति अपने कर्मो के आधार पर उनका फल ग्रहो की स्थितियो के द्वारा मिल सके|

जिस प्रकार सूर्य का प्रकाश हर-एक को सुख देता है और कभी वही प्रकाश गर्मी मे झुलसा देता है, उसी प्रकार हर-एक ग्रह अपना-अपना प्रभाव डालते है जो कभी हमे लाभ पहुँचाते है और कभी नुकसान भी पहुँचाते है|

सदियो पहले भी हमारे पूर्वज इन ग्रहो की स्थिति की गणना कर सकते थे उन्होने हर ग्रहो की स्थितियो का वर्णन इतिहास मे लिखा था, जो आज साबित हुआ है|

ज्‍योतिष मे ग्रहो की स्थिति क्या है और वह हमारे जीवन मे क्या प्रभाव डालेगी, इसकी गणना ज्योतिष द्वारा ही की जाती है|

ग्रहो की इन्ही स्थितियो को जानिए मेरे नज़रिए से, जानिए की वह आपके जीवन मे क्या प्रभाव डालेंगे, कब कौन से ग्रह की स्थिति है जो आपको लाभ पहुँचाएगी, जिससे आप अपने जीवन मे आगे बढ़ सकते है और तथा कौन सा ग्रह आपको हानि पहुँचा सकता है जिससे आप अपने को संभाल सके!

नव ग्रह और रत्न

ईश्वर बहुत दयालु एवं कृपालु है, वो हम पर कृपा करते है और हमारी ग़लतियो को भी क्षमा करते है| हम सभी पर अपनी दया बरसाने के लिए हर तरह से ईश्वर ने माध्यम बनाया, सृष्टि के निर्माण के समय हर चीज बनी, सुख के साथ दुख, अच्छाई के साथ बुराई| हम ईश्वर के जितना करीब जाते है, उतनी ईश्वर हमारी भी हर तरह से मद्द्द करते है और मद्द्द के माध्यम भी ईश्वर ने ही निर्माण करे, जब ग्रह बने और उनके कार्य बने कि मनुष्य, देवी, देवता सभी को उनके करमो के आधार पर फल मिले तो उन ग्रहो के कष्टो के कम करने के हेतु नव रत्नो का भी निर्माण हुआ, कुछ रत्न पृथ्वी(धरती) मे और कुछ समुद्र मे छोड़ दिए, कि वह हमे किसी नुकसान या कष्ट मे लाभ पहुँचा सके, रत्नो मे जेसे पुखराज इस प्रकार का ज़मीन से निकलता है और उसकी कटिंग करके उसको तराशा जाता है तो वह कुछ इस प्रकार का होता है और पहनने के योग्य होता है| जो मान- सम्मान कारोबार की उन्नति के लिए अति उत्तम है उन्ही रत्नो मे नीलम भी उसी प्रकार का रत्न है, यह भी ज़मीन से निकलता है और यह तो शनि के प्रभाव को कम करता है और भाग्य उन्नति के लिए ही बना है|

गोमेद ये भी अलग-अलग जगह से ज़मीन से ही निकलता है और तराशने के बाद इस तरह का होता है| इसका भी ग्रहो के प्रभाव मे महत्वपूर्ण योगदान होता है|

मूँगा रत्न समुद्र से निकलता है और ये समुद्र मे किसी पत्थर की तरह नही होता, समुद्र की लकड़ी होती है जो दिखने मे कुछ इस प्रकार की होती है और इसको भी तराशने के बाद मे उपयोग मे लाया जाता है| मूँगा मंगल के प्रभाव को कम करने के लिए उतम है|

इसी प्रकार अन्य रत्न है जो ईश्वर ने अलग-अलग ग्रहो के प्रभाव को कम करने के लिए हमारे लिए बनाए है| इसी तरह आपके जीवन मे किस ग्रह का प्रभाव पड़ रहा है और वह कब तक रहेगा, उन प्रभाव को कम करने के लिए कौन सा रत्न धारण करना है, कब तक पहनना या जीवन भर धारण करना है वह हम आपको ज्योतिष गणना के आधार पर आपको बताएगे, जिसको धारण व उपाय करने से आप अपनी परेशानियो को कम कर सकते है| वेदो, पुराणो मे ग्रहो की स्थिति के आधार पर ही हमारे जीवन मे किस ग्रह का क्या प्रभाव है, इसका हिसाब लगाना ही ज्योतिष ज्ञान है, आपके जन्म के समय कौन सा ग्रह कहाँ है, उस ग्रह की स्थिति ही आपके जीवन मे प्रभाव डालती है| आपके भविष्य मे क्या होना है या क्या होगा ये उन ग्रहो की स्थिति और वर्तमान की ग्रहो की स्थिति का गणित निकाल कर ही आपका वर्तमान और भविष्य बताया जा सकता है|

राशिराशि की तिथिराशि रत्न
मेषमार्च 22 से अप्रैल 20हीरा
वृषभअप्रैल 21 से मई 21पन्ना
मिथुनमई 22 से जून 21मोती
कर्कजून 22 से जुलाई 23माणिक
सिंहजुलाई 24 से अगस्त 21पेरिडोट
कन्याअगस्त 22 से सितंबर 21पुखराज
तुलासितंबर 22 से अक्टूबर 23ओपल
वृश्चिकअक्टूबर 24 से नवंबर 21पुखराज
धनुनवंबर 22 से दिसंबर 21फीरोजा़
मकरदिसंबर 22 से जनवरी 20गार्नेट
कुंभजनवरी 21 से फरवरी 19स्फटिक
मीनफरवरी 20 से मार्च 21एक्वामरीन
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कुंडली का मतलब जन्म के समय ग्रहों की स्थिति है| जब भी कोई बच्चा किसी परिवार में पैदा होता है तो उस नवजात शिशु की जन्मपत्री(जतकम, या कुंडली) बनाई जाती है| इस प्रथा का हिंदू परिवार में सदियों से पालन किया जाता है| उसकी जतकम या कुण्डली हिन्दू वैदिक ज्योतिषी पर आधारित होती है| इसलिए, जनम कुंडली हमारे जीवन को गहराई से समझने तथा उसे बेहतर बनाने के लिए और शांति, सफलता और समृद्धि के पथ पर हमारे जीवन को चलाने के लिए बहुत ज़रूरी है|


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